नीतीश कुमार ने सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के पद की शपथ ले ली है. कहने को तो बिहार में नीतीश कुमार की सरकार है, लेकिन पूरा कंट्रोल बीजेपी का दिखाई दे रहा है. हमेशा छोटे भाई की भूमिका में रहने वाली बीजेपी अब बड़े भाई की भूमिका में आ गई है. चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के खराब परिणाम का सीधा असर नीतीश मंत्रिमंडल पर दिखाई दे रहा है.

अब तक बिहार में एक ही डिप्टी सीएम हुआ करते थे, लेकिन इस बार बिहार में दो-दो डिप्टी सीएम नजर आयेंगे. मजे की बात यह है कि दोनों ही डिप्टी सीएम बीजेपी के हैं. बीजेपी के तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को नीतीश की नई सरकार में उपमुख्‍यमंत्री बनाया गया है. इसके साथ ही बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भी अपने नाम करवा ली है. जाहिर सी बात है कि बीजेपी के दो डिप्टी सीएम और विधानसभा अध्यक्ष की मौजूदगी में नीतीश कुमार का आजादी से काम करने संभव नहीं रह गया है.

नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में सभी जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखा गया है. सभी जातियों के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है, लेकिन एक भी मुसलमान को नीतीश कुमार ने इस बार मंत्री नहीं बनाया है. बीजेपी कोटे से तो किस मुसलमान का मंत्री नहीं बनना समझ में आता है, लेकिन जदयू के कोटे से भी किसी मुसलमान को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है. बिहार में पहली बार किसी मुसलमान को राज्य सरकार में शामिल नहीं किया गया है.

सोमवार को बिहार की नई एनडीए सरकार में नीतीश कुमार के साथ 14 मंत्रियों ने शपथ ली. इनके नाम तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, विजय चौधरी, बिजेंद्र यादव, अशोक चौधरी, मेवालाल चौधरी, शीला कुमारी, संतोष सुमन, मुकेश सहनी, मंगल पांडेय, रामसूरत राय, अमरेंद्र प्रताप सिंह, रामप्रीत पासवान और जीवेश मिश्रा हैं.

कहा जा रहा है कि जल्द ही नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार किया जायेगा. कुछ और मंत्री शामिल किये जायेंगे. उम्मीद है कि उस वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुस्लिम समुदाय का भी प्रतिनिधित्व अपनी मंत्रिमंडल में शामिल करेंगे.

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