बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिनों के बंगाल दौरे पर हैं. उन्होंने अपने इस दौरे का समापन शुक्रवार को कोलकाता में एक प्रेस कांफ्रेंस कर किया. इससे पहले दौरे के पहले दिन गुरुवार को उन्होंने आदिवासी बहुल बांकुड़ा में महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासियों के पुज्य बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए. लेकिन आदिवासियों को लुभाने की यह कोशिश बीजेपी और अमित शाह को भारी पड़ गई है.

बिरसा मुंडा की जिस प्रतिमा पर अमित शाह फूल चढ़ाने गये थे, उसे लेकर विवाद हो गया है. जिस मूर्ति पर बीजेपी के नेता फूल माला चढ़ाने जा रहे थे, वह दरअसल बिरसा मुंडा की प्रतिमा नहीं थी बल्कि एक दूसरे आदिवासी नेता की मूर्ति थी.

बीजेपी के नेताओं को जैसे ही अपनी गलती का पता चला, उन्होंने आनन-फानन में बिरसा मुंडा की तस्वीर मंगवाई और मूर्ति के नीचे पैरों के पास रखकर उस पर फूल माला चढ़ाई गई. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. इस हरकत से आदिवासी भड़क उठे हैं.

आदिवासी नेताओं के एक संगठन भारत जकात माझी परगना महल ने कहा है कि गुरुवार की घटना से आदिवासी समाज खुद को ठगा हुआ और व्यथित महसूस कर रहा है. आदिवासी संगठन ने इसे भगवान बिरसा मुंडा का अपमान बताया है. शुक्रवार को स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों ने मूर्ति को शुद्ध करने के लिए उस पर गंगा जल का छिड़ाव किया.

इस घटना ने सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बीजेपी और अमित शाह पर हमला करने का अच्छा मौका प्रदान कर दिया है. टीएमसी ने अमित शाह को बाहरी करार देते हुए ट्वीट कर कहा, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल की संस्कृति से इतने अनभिज्ञ हैं कि उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को एक गलत मूर्ति की माला पहनाकर अपमानित किया और उनकी तस्वीर को किसी और के पैर में रख दिया. क्या वह कभी बंगाल का सम्मान करेंगे?”

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