नीतीश के 14 मंत्रियों के साथ शपथ लेने के बाद सबसे बड़ा सवाल विभागों के बंटवारे को लेकर उठना था और वह थमता दिख भी नहीं रहा। थोड़ी देर में नीतीश कैबिनेट की पहली बैठक होने वाली है और अबतक भाजपा-जदयू में विभागों को लेकर असहज स्थिति नहीं संभली है। शुरुआत से गृह विभाग मुख्यमंत्री रखे हुए हैं और वित्त मंत्रालय सुशील कुमार मोदी डिप्टी रहते संभालते रहे थे। इस बार सुमो नहीं हैं और वित्त मंत्रालय संभालने लायक भाजपा ने डिप्टी नहीं रखा है, इस आधार पर NDA के सबसे बड़े दल ने ‘फाइनेंस’ की शर्त पर नीतीश से उनका ‘गृह’ मांगा, लेकिन वह देने को तैयार नहीं हैं। शपथ में शामिल होने के बाद सोमवार देर रात तक गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी इसी मसले पर माथापच्ची करते रहे, लेकिन समाधान नहीं निकाल सके। NDA में चार विधायक देकर मंत्री का पद ग्रहण कर चुके VIP के अध्यक्ष भास्कर की खबर के अनुसार ही भारी-भरकम मंत्रालय चाह रहे हैं। वह नगर विकास विभाग की इच्छा जता चुके हैं, जबकि HAM के प्रमुख जीतनराम मांझी ने मंत्रालय को लेकर जिद तो नहीं की है लेकिन MLC की एक सीट जरूर मांग दी है।

दरअसल, भाजपा की मजबूरी ये है कि उसके पास अभी वित्त विभाग संभालने लायक मंत्री नहीं है। डिप्टी सीएम बनाए गए हैं इंटर पास तार किशोर और रेणु देवी। रेणु देवी को तो कला और संस्कृति विभाग मिलना तय है, पर बड़े विभाग के नाम पर तार किशोर के लिए वित्त संभालना मुश्किल होगा। ऐसे में ज्यादा बड़े गृह विभाग को भाजपा अपने पास रखकर एक तीर से दो निशाने साध सकती है।

पहला- तार किशोर अनुभवी होने के नाते वित्त विभाग का मैनेजमेंट संभाल लेंगे। दूसरा- बिहार में बड़े भाई की भूमिका में आ चुकी भाजपा को भी एक बड़ा विभाग मिल जाएगा।

दो चौधरी तो तय थे- विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी। तीसरे मेवालाल चौधरी का नाम मंत्रिमंडल की पहली सूची में देकर नीतीश कुमार ने अपनी ही किरकिरी करा ली है। मेवालाल पर 2010 में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। उन्हें अपनी कुर्सी तक गंवानी पड़ी थी। इस हालत के बावजूद नई सरकार के शपथ ग्रहण में जदयू के पास बड़े विभागों का आना तय है।

जदयू ने तीन चौधरी के अलावा सबसे अनुभवी बिजेंद्र यादव को पहली सूची में लाकर चार बड़े विभाग पर अपना दावा पेश कर दिया है। इसके अलावा VIP के अध्यक्ष मुकेश सहनी और HAM सुप्रीमो जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी भी कम महत्व के विभाग से संतोष कर लें, ऐसा मुश्किल लगता है। हालांकि, अब मुकेश ने नगर विकास की डिमांड सामने कर दी है और मांझी MLC लेकर समझौते के लिए तैयार हैं।

ऐसे में नीतीश के बाद दूसरे नंबर पर शपथ लेने वाले मंत्रिमंडल के नए चेहरे तारकिशोर प्रसाद को छोड़ दें तो पहली सूची में भाजपा के सिर्फ मंगल पांडेय और अमरेंद्र प्रताप सिंह का नाम ही बड़ा है। भाजपा के मंगल पांडेय को एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग और जदयू के विजेंद्र यादव को ऊर्जा मिल सकता है। भले ही घोटालों के विवाद में रहे, लेकिन जदयू के मेवालाल चौधरी कृषि विवि के कुलपति रहने के आधार पर कृषि मंत्रालय का प्रभार लें तो आश्चर्य नहीं होगा।

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