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15 अगस्त 2020 को हम सब आज़ाद भारत के रूप में 73 वर्ष पूरे कर रहे हैं। सभी भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत बधाईयाँ। इस ज़श्न के अवसर पर हमें अतीत के भारत को याद करते हुए भविष्य के भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार करनी चाहिए। जिससे हम भारतीय एक देश और एक समाज के रूप में तरक्की की ऊंचाइयों को छुएँ और हमारा तिरंगा दुनिया भर की बुलंदियां हासिल करे।

सबसे पहले हमें भारत के उन महान व्यक्तियों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना चाहिये जिन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत को उखाड़ फेंकने और आज़ाद भारत का सपना देखा था, जिनके जीवित रहते तो ये सपना पूरा न हो सका किन्तु आने वाले देश प्रेमियों ने इसे अवश्य पूरा किया। इस सपने को देखने वालों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसमें महामहिला रानी लक्ष्मीबाई और उनकी सहायक झलकारीबाई कोरी व इन्हीं की समकालीन एवं 1857 के विद्रोह में बढ़-चढ़ हिस्सा लेने वाली बेग़म हज़रत महल आदि महिलाएं महत्वपूर्ण हैं।

आजादी के आंदोलन में अनेक  युवाओं ने अपना योगदान दिया। इन युवाओं में सरदार भगतसिंह, राजगुरू, सुखदेव का योगदान उल्लेखनीय है, आप किशोरावस्था में ही देश को अंग्रेजी राज से मुक्त कराने के आंदोलन में कूद गए गये और फाँसी के फंदे को भी गले लगाने से पीछे नही हटे। आज़ादी के आंदोलन में योगदान और देशप्रेम की अनूठी मिसाल के लिए आपको अनंत काल तक याद किया जाएगा। इनके साथ ही चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला खां उन युवा भारतीयों में शुमार होते हैं जिन्होंने देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया और इसके लिए हर कुर्बानी देने को तैयार रहे।

युवा आंदोलनकारी देश को आज़ाद कराने में अपनी तरह से योगदान कर थे, तो जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, सरदार बल्लभ भाई पटेल, महात्मा गांधी, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, तेज बहादुर सप्रू आदि नेता जनांदोलन के माध्यम से देश को आज़ाद कराने में प्रयासरत थे। उक्त नेताओं ने अपने जीवन काल में अनेकों ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ सभाएं की, यात्राएँ निकाली, हड़ताल की, जनांदोलन खड़े किये। इन नेताओँ की राष्ट्रवादी गतिविधियों से परेशान होकर अंग्रेजी हुकूमत ने इन्हें कई बार जेल में डाला, पर हमारे आंदोलनकारी नेता कभी पीछे नही हटे। जेल से छूटने के बाद फिर आंदोलन में जुट जाते थे। आपके आंदोलन और संघर्ष की कहानियां सदियों तक भारतीयों को देशसेवा के लिये प्रोत्साहित करती रहेंगी।

15 अगस्त 1947 को देश के आज़ाद होने के बाद एक देश और समाज के रूप में हमने काफ़ी तरक्की हासिल की है, इस तरक्की को हासिल करने का श्रेय भारतीयों को जाता है जिन्होंने दिन रात मेहनत और ईमानदारी के बल पर आज भारत को इस मुक़ाम तक पहुँचाया है। भारत ने पिछले 73 वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान और सैटेलाइट तकनीकी में उल्लेखनीय तरक्की हासिल की है। आज हमारी सैटेलाइट तकनीक इतनी प्रगति कर चुकी है हम अपने साथ-साथ दूसरे देशों के उपग्रहों को भी अंतरिक्ष मे स्थापित करने में सक्षम हैं। आज भारत में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सम्पन्न हैं जिसका उपयोग कूटनीति के साथ साथ ऊर्जा के उत्पादन में भी किया जा रहा है, जो देश को आर्थिक प्रगति में मदद कर रहा है।

आज हमारे सैनिक बधाई के पात्र है जो सर्दी, गर्मी, बरसात सभी मौसम में देश की आंतरिक और बाहरी ग़ैर-सामाजिक ताकतों से हमारी सुरक्षा करते हैं, ताकि आम भारतवासी आराम से रह सके। इसके साथ ही हमारे किसान भाई भी बधाई के पात्र है जो दिन रात मेहनत करके खेतों में काम करते हैं और सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए अन्न उपजाते है। आज  खेतों तथा निर्माण कार्य में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर बधाई के पात्र हैं जो तेज धूप, सर्दी और बारिश में मेहनत करके व अपनी जान जोख़िम में डाल कर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण करते हैं जिनका इस्तेमाल हम अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, दफ़्तर, स्टेशन, आदि के रूप में करते हैं। वो सभी नागरिक बधाई के पात्र हैं जो किसी न किसी तरह से देश को तरक्की की ओर ले जा रहे हैं। वर्तमान में कोरोना महामारी से लड़ने में हमारी मदद करने वाले हमारे डॉक्टर, नर्स, व अन्य स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस कर्मचारी विशेष बधाई के पात्र हैं जो अपनी जान जोख़िम में डाल कर कोरोना वायरस से लड़ने में हमारी मदद कर रहे हैं। इन सबके साथ कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जिसमें हमें और कार्य करने की आवश्यकता है।

भारत की न्याय प्रक्रिया में सुधार विमर्श का विषय है। यहाँ पीड़ित को समय पर न्याय नहीं मिल पाता है, जबकि समय पर न्याय नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। भारत मे न्याय मिलने में होने वाली देरी का कारण न्यायालयों और जजों की कमी का होना है, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जज भी जजों और अदालतों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। केंद्र व राज्यों की सरकारों कों इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

भारत के संविधान में शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल किया गया है। किंतु प्रायः विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी देखी जाती है जिससे पठन-पाठन का कार्य सुचारू रूप से नही हो पाता है, यह कमी उच्च शिक्षा में विकराल रूप धारण किये हुये है। अतः केंद्र व राज्य की सरकारों को शीध्र शिक्षकों की भर्ती करने की आवश्यकता है जिससे कक्षा में शिक्षक छात्र अनुपात उचित रहें, और कोई नागरिक शिक्षा से वंचित न हो पाये।

स्वास्थ्य का अधिकार गरिमामयी जीवन के अधिकार का अंग होना चाहिये। हालांकि भारत ने स्वास्थ्य के मामले में पिछले 70 वर्षों में काफी तरक्की की है जिसके फलस्वरूप ही पोलियो, हैजा जैसी घातक बीमारियों से मुक्ति मिल पाई है और टी०वी० व प्रसूति रोगों पर चिकित्सीय नियंत्रण स्थापित हुआ है। साथ ही पहले की तुलना में जन्म के समय मातृ मृत्यु दर अब लगभग नगण्य है अर्थात महिला स्वास्थ्य के मामलों में हमने काफ़ी तरक्की हासिल की है। इन उपलब्धियों का श्रेय हमारे स्वास्थ्य कर्मियों को जाता है। उपरोक्त उपलब्धियों के बावजूद भारत में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता कम है और निजी क्षेत्र का इलाज़ बहुत महंगा है जो आम भारतीय की पहुँच से दूर है अतः केंद्र व राज्य की सरकारों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिये जिससे ग़रीब से ग़रीब भारतीय को भी अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

पिछले कुछ वर्षों में समाज मे प्रायः जातीय व धार्मिक तनाव देखने को मिल रहे हैं, इस प्रकार के तनाव भारत की आर्थिक व सामाजिक तरक्की में समस्या पैदा करते हैं। अतः केंद्र व राज्य सरकारों को कानून का राज स्थापित करने की ओर ध्यान देना चाहिये जिससे सभी धर्मों व जातियों के नागरिक सुरक्षित व समान महसूस करें, परन्तु राष्ट्र निर्माण की ये प्रक्रिया बिना नागरिकों के योगदान के अधूरी है। यह देश हमारा है और इसे धरोहर के रूप में देश के क्रांतिकारियों ने हमको सौंपा है। संविधान में निहित मौलिक कर्तव्य के परे भी हमारा एक महत्वपूर्ण योगदान है, राष्ट्र की अस्मिता और अखंडता की रक्षा करना, किसी भी द्वेष, घृणा, अराजकता को राष्ट्र की समृद्धि में बाधक ना बनने देना। डॉक्टर के लिए मरीजो की सेवा ही उसका राष्ट्रवाद है, वकील के लिए वकालत, वैज्ञानिक के लिए आविष्कार और अनुसंधान। राष्ट्रवाद का सार्थक स्वरूप यही है जहां कर्तव्य परायणता नागरिकता का आधार भी हो और देशभक्ति का सबूत भी।

उपरोक्त कुछ ऐसे मुद्दे है जिन पर आज राष्ट्रीय पर्व के मौक़े पर सभी भारतीयों को विचार करना चाहिये जिससे भविष्य का भारत और शांति व समृद्धि हासिल करें। आज के मुबारक मौके पर मशहूर शायर/लेखक गुलज़ार का लिखित गीत गुनगुनाया जा सकता है-

"ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू,
मैं जहाँ रहूं जहाँ में याद रहे तू,
ऐ वतन मेरे वतन,
तू ही मेरी मंजिल है पहचान तुझी से ,
पहुंचूं जहां भी मैं, मेरी बुनियाद रहे तू
ऐ वतन मेंरे वतन,
तुझपे कोई गम की आंच आने नही दूं,
कुर्बान मेरी जान तुझपे शाद रहे तू
ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू,
मैं जहाँ रहूं जहाँ में याद रहे तू"
ऐ वतन मेरे वतन
(स्रोत:- राज़ी)
सभी भारतीयों को स्वतंत्रता पर्व की एक बार फिर बहुत बहुत मुबारकबाद..

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