राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए किसी भी मुद्दे को हथियार बना सकते हैं, लेकिन बीमारी और उसकी दवा को राजनीतिक हथियार बनाने का कारनामा दुनिया में पहली बार बीजेपी ने कर दिखाया है. जिस कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. अमेरिका जैसा सुपरपावर भी जिस के सामने घुटने टेक चुका है. उस कोरोना वायरस और उसकी वैक्सीन का बीजेपी ने राजनीतिकरण कर दिया है.

बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को अपना घोषणापत्र जारी किया. जिसमें रोजगार, शिक्षा, बिजली, विकास जैसे तमाम वादे किये गये हैं. लेकिन इस घोषणापत्र में सबसे रोचक और चौंका देने वाला नाम कोरोना वैक्सीन का है.

बीजेपी अब तक हिंदू-मुसलमान, राम मंदिर, अनुच्छेद 370, पाकिस्तान और सेना के नाम पर राजनीति करती आई है, लेकिन इस बार उसने सभी हदों को पार कर लिया है. बीजेपी कोरोना वैक्सीन के नाम पर बिहार की चुनावी जंग को जीतने की कोशिश कर रही है.

अपने घोषणापत्र में बीजेपी ने वादा किया है कि बिहार में उसकी सरकार बनने पर प्रत्येक बिहार वासी को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन (टीका) दिया जायेगा. यानी बीजेपी को वोट देने पर ही बिहार के लोगों को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन मिलेगा, महागठबंधन की जीत होने पर बिहार के लोगों को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन नहीं मिलेगा. उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.

मजे की बात यह है कि कोरोना का टीका अभी तक बना भी नहीं है. न ही किसी ने साफ यह कहा है कि कब तक यह तैयार हो जायेगा. उससे भी बड़ी बात यह है कि दुनिया के हर देश ने अपने नागरिकों को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन देने का एलान कर दिया है. भारत के सभी राज्यों के लोगों को भी मुफ्त में कोरोना का टीका लगाया जायेगा. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि फिर बीजेपी ने बिहार के वोटरों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने का वादा क्यों किया है. क्या बीजेपी को बिहार में अपना रास्ता कठिन दिखाई देने लगा है, इसलिए वह कोरोना के बल पर चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है.

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