रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लक्ष्मी विलास बैंक को मोरेटोरियम में डाल दिया और ग्राहकों के लिए निकासी की सीमा तय कर दी। बैंक पिछले कई महीनों से वित्तीय संकट का सामना कर रहा है और किसी सहयोगी की तलाश कर रहा था। आरबीआई ने बैंक से 25 हजार की निकासी की सीमा तय कर दी जिसके बाद ग्राहकों में खलबली मच गई। बैड लोन और गवर्नेंस के मामलों के मध्य आरबीआई ने लक्ष्मी विलास बैंक को डीबीएस बैंक में मर्ज करन के लिए दबाव बनाया। पहली बार ऐसा हुआ है जब आरबीआई किसी बैंक को बचाने के लिए विदेशी बैंक का सहारा ले रहा है।

आरबीआई के मुताबिक पिछले तीन साल से लक्ष्मी विलास बैंक नुकसान में है। यह भी कहा गया कि बैंक अपने नुकसान की भरपाई में सक्षम नहीं है। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘किसी मजबूत रणनीति के अभाव में बैंक नुकसान की भरपाई करने और एनपीए को कम करने में सक्षम नजर नहीं आ रहा है।’

लक्ष्मी विलास बैंक का हेडक्वार्टर चेन्नै में है। उसने इंडियाबुल्स हाउजिंग फाइनैंस लिमिटेड के साथ मर्जर का प्रस्ताव रखा था लेकिन आरबीआई ने इस अस्वीकार कर दिया। इसके बाद क्लिक्स कैपिटल लिमिटेड के साथ विलय का प्रस्ताव भी फेल हो गया। आरबीआई ने कहा कि संकट में घिरा बैंक कोई मजबूत प्रस्ताव पेश नहीं कर पाया है। इसके बाद इस साल 17 नवंबर को लक्ष्मी विलास बैंक को मोरेटोरियम में डाल दिया गया। यह आदेश 16 दिसंबर 2020 तक लागू है। 1949 के बैंकिंग रेग्युलेशन ऐक्ट के सेक्शन 45 के तहत यह कार्रवाई की गई है।

आरबीआई ने कहा कि लक्ष्मी विलास बैंक और डीबीएस की इंडिया यूनिट का मर्जर किया जाए। इससे बैंक को स्थायित्व मिल सकता है और ग्राहकों के हितों की रक्षा की जा सकती है। अगर यह विलय होता है तो डीबीएस अपनी इंडिया यूनिट में 25 हजार करोड़ इंजेक्ट करेगा। डीबीएस बैंक की भारत भर में 20 ब्रांच हैं। यह दुबई का बैंक है। अगर लक्ष्मी विलास बैंक का विलय होता है तो देश में डीबीएस का भी विस्तार होगा। अभी लक्ष्मी विलास बैंक की 550 शाखाएं और 900 से ज्यादा एटीएम हैं। येस बैंक पर भी संकट की वजह से ही निकासी की सीमा तय की गई थी।

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