22 सितंबर 2019 को मौलाना कलीमुद्दीन मुजाहिर को अलकायदा के साथ संबंध के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। वह पिछले एक साल से अधिक से UAPA के तहत जेल में बंद थे। झारखंड हाईकोर्ट ने 3 नवंबर को मौलाना कलीमुद्दीन मुजाहिर को जमानत दे दी। कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि मौलाना का अल कायदा के साथ संबंध के कोई सबूत नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि मौलाना को जमानत देते हुए जस्टिस कैलास प्रसाद देव की बेंच ने कहा कि ” इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता एक मौलाना है जिसका कोई आपराधिक मामला नही चल रहा है, यह न्यायालय याचिकाकर्ता को जमानत देने के लिए इच्छुक है। “

आपको बता दें कि जब मौलाना को गिरफ्तार किया गया था तब मीडिया ने नंगा नाच कर मौलाना को आतंकवादी बताया था। मौलाना की गिरफ्तारी पर नवभारत टाइम्स ने लिखा ” अल कायदा का आतंकी कलीमुद्दीन मुजाहिर अरेस्ट, मदरसे में रह कर बना रहा था प्लान”

लेकिन जब उसी मौलाना को जिसे मीडिया ने आतंकवादी बताया था कोर्ट ने जमानत देते हुते कहा की इनका अल कायदा के संबंध के कोई सबूत नहीं है तब सारी मीडिया चुप है। किसी ने इसपर कोई खबर तक नहीं चलाई। ( इंडियन टीवी)

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