प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके सरकार के मंत्री और बीजेपी के तमाम बड़े-छोटे नेता लगभग रोजाना यह दावा करते हैं कि उनकी सरकार ने जो काम कर दिखाया है, वो पिछले 70 साल में नहीं हुआ है. उनके इस दावे में कितनी सच्चाई है यह तो इतिहास ही बतायेगा, लेकिन ये तो सच है कि पिछले 70 साल में देश में पहली बार ऐसा हुआ है, जब दशहरा के मौके पर लोगों ने रावण की जगह अपने देश के प्रधानमंत्री का पुतला जलाया है.

रविवार को देश भर में धूमधाम और श्रद्धा के साथ दशहरा मनाया गया. हर साल दशहरा के मौके पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बुराई पर अच्छाई की जीत के रुप में जलाये जाते हैं, लेकिन इस साल देश के कई हिस्सों में रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके मंत्रियों और उनके करीबी उद्योगपतियों अंबानी व अडाणी के पुतले जलाये गये.

प्रधानमंत्री, उनके मंत्रियों और उनके करीबी उद्योगपतियों के खिलाफ सबसे ज्यादा गुस्सा पंजाब में देखने को मिला, जहां मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ अन्नदाताओं का आंदोलन जारी है. पंजाब के कई इलाकों में किसानों ने रावण के बजाय प्रधानमंत्री का पुतला जला कर अपने गुस्से और नाराजगी को प्रकट किया.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, “कल पंजाब में यह हुआ. यह दुखद है कि प्रधानमंत्री के प्रति पंजाब में इतना गुस्सा है. यह एक खतरनाक मिसाल है और देश के लिए अच्छा नहीं है. प्रधानमंत्री को उनके पास जाना चाहिए, उनकी बात सुननी चाहिए और उन्हें तुरंत राहत देनी चाहिए.”

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