मोदी सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू करने की सुगबुगाहट शुरू कर दी है. इसके साथ ही इसके विरोध में भी आवाजें बुलंद होने लगी है. पूर्वोत्तर के राज्यों में तो बाकायदा विरोध प्रदर्शन तक शुरू हो गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका में भी सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ आवाज उठने लगी है.

अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के अल्मेडा काउंटी ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है. अल्मेडा काउंटी बोर्ड ऑफ सुपरवाइज़र्स ने प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि हमलोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और भारत में नागरिकता के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध करते हैं जो एक साथ मुसलमानों, उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों, महिलाओं और स्वदेशी लोगों के प्रति भेदभावपूर्ण हैं.

वहीं दूसरी तरफ यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ने भारत को “विशेष चिंता वाला देश (सीपीसी)” के रूप में नामित किया है. आयोग ने 2020 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत “व्यवस्थित, चल रही, उदासीन आर्थिक स्वतंत्रता में संलग्न और सहन कर रहा था. अल्मेडा काउंटी ने यह प्रस्ताव इसी रिपोर्ट के संदर्भ में लिया है.

भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद ने कैलिफोर्निया राज्य में अल्मेडा काउंटी द्वारा भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनपीआर व एनआरसी के खिलाफ पारित प्रस्ताव का स्वागत किया है.

भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद के अध्यक्ष अहसान खान ने कहा कि अल्मेडा काउंटी द्वारा पारित प्रस्ताव, अमेरिकी और भारतीय लोकतंत्रों के मूल्यों के अनुरूप है. इसलिए, मेरा दृढ़ता से मानना ​​है कि भारत सरकार के बहिष्करण कानूनों के लिए विभिन्न नगर परिषदों का ऐसा विरोध, आने वाले बीडेन प्रशासन के लिए एक मॉडल होना चाहिए.

यह अमेरिका में हिंदू राष्ट्रवाद के समर्थकों के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि अल्मेडा काउंटी 1.6 मिलियन से अधिक की आबादी के साथ सिलिकॉन वैली में सबसे बड़े काउंटियों में से एक है. अल्मेडा काउंटी राज्य में सातवीं सबसे अधिक आबादी वाले काउंटी के रूप में गिना जाता है और सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र में 14 शहरों को शामिल करता है. इससे पहले सैन फ्रांसिस्को, सिएटल, कैम्ब्रिज, अल्बानी, सेंट पॉल और हैमट्रैक नगर परिषद नरेंद्र मोदी सरकार के बहिष्करण नागरिकता कानूनों और प्रावधानों का विरोध कर चुके हैं.

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