पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बढ़ती ताकत से परेशान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक बड़ी राहत मिली है. बिहार में अपनी पार्टी एआईएमआईएम के शानदार प्रदर्शन से बेहद उत्साहित असदुद्दीन ओवैसी ने आश्चर्यजनक रुप से ममता बनर्जी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है.

बिहार में अपनी पार्टी के प्रदर्शन से गदगद एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की निगाहें अब पश्चिम बंगाल पर हैं. ओवैसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हाथ मिलाने का ऑफर दिया है. ओवैसी ने ममता के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन की पेशकश करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराने में तृणमूल कांग्रेस की मदद करेगी.

बिहार में 5 सीटें जीतने के बाद एआईएमआईएम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है. बिहार चुनाव परिणाम आते ही ओवैसी ने ऐलान किया था कि वह पश्चिम बंगाल चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे. एआईएमआईएम की नजर राज्य के अल्पसंख्यक आबादी वाले मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर पर जिलों पर है. ओवैसी के इस एलान ने ममता बनर्जी के साथ-साथ कांग्रेस और लेफ्ट की नींद उड़ा दी है. बता दें कि कांग्रेस और लेफ्ट आगामी विधानसभा चुनाव मिल कर लड़ेंगे.

बिहार के मुकाबले पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक वोट ज्यादा अहम है. यहां मुसलमानों की आबादी 30 प्रतिशत से ज्यादा है. मुस्लिम वोटर राज्य की 294 में से 100 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक पोजिशन में हैं. ऐसे में ओवैसी के पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने की घोषणा से तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और लेफ्ट का परेशान होना स्वभाविक है.

ओवैसी के दोस्ती के प्रस्ताव ने ममता बनर्जी को राहत तो पहुंचाई है, लेकिन राजनीतिक जानकार ओवैसी के इस प्रस्ताव को भी शक की नजर से देख रहे हैं. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के साथ हाथ मिलाने का एलान कर ओवैसी हकीकत में बीजेपी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. उनके इस कदम से बीजेपी को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में और ज्यादा मदद मिलेगी.

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