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मनिष सिंह

ईश्वर आपको धीरज दे ..
इसलिए कि इस वक्त हिंदुस्तान को बनाना या बिगाड़ना, जितना आपके हाथ मे है, उतना पहले कभी नही था। इस जालीदार टोपी के पाक धागों पे इस देश के 130 करोड़ लोगों का मुस्तकबिल टिका है।

यह परीक्षा की घड़ी है। इतनी बड़ी जिम्मेदारी किसी और दौर में नही थी। । इस मुल्क को, जिसे आपके पुरखों ने चुना था, उसकी हिफाजत करने का दारोमदार आपके, केवल आपके हाथों में सौप दिया गया है। इसलिए कि “आपका होना” ही मुद्दा बन गया है। इसलिए कि आपके धर्म, संस्कृति और रवायतों ही मुद्दा बना लिया गया है।

घर मे, मोहल्ले में, नुक्कड़ पर, बाजारों में, टीवी पर और सोशल मीडिया पर आपके ऊपर निगहबानी बंधी है। कपड़ों से पहचाना जा रहा है। एक एक शब्द और व्यवहार परखा जा रहा है। इस उम्मीद में कि कहीं तो मौका मिले, कोई कारण मिले, कोई बहाना मिले जिससे वो करने के लिए आप पर तोहमत मढ़ी जा सके, जो करने के लिए एक .. बस एक मौके की तलाश है।

जब तक आप धीरज धरेंगे, इग्नोर करेंगे, तब तक हिंदुस्तान जियेगा। यह वक्त कट जाएगा, उनका अच्छा और हमारा बुरा वक्त गुजर जाएगा। तो इस धीरज को तोड़ने के लिए सोशलमीडिया और अखबारों में, यारो के बीच और अंजानो में, आपको उकसाया जाएगा। प्रतिक्रिया की चाहत होगी।

बस एक प्रतिक्रिया, हल्की, छोटी औऱ हार्मलेस प्रतिक्रिया। और फिर वह होगा, जो बंगलूरू में हुआ। दूसरों की फैथ की रक्षा करने के लिए आपकी बनाई मानव श्रृंखला को सुर्खियां नही मिलेंगी। मिलेंगी उन नासमझों को, जो धैर्य खोकर, भीड़ बनकर, किसी नासमझ जोशीले, या बिके हुए रहनुमा के पीछे चल पड़े। उसी वक्त हिंदुस्तान हार जाएगा। बंगलौर, बहराइच और बनारस हार जाएगा।


यह धैर्य ही जवाब है, धैर्य ही उत्तर है, धैर्य ही जीत है। यह धैर्य ही भारत का कवच है, भारतवासियों का कवच है। यह धैर्य ही भारत को इस दौर से सुरक्षित निकाल ले जाएगा।

क्या आपको लगा कि मैंने आपको कमतर आंका? क्या आपको लगता है कि ये सब कहकर आपके बीच भय फैलाया। तो सचाई सुनिए, भयभीत तो आपसे अधिक हम है। हर वो हिंदुस्तानी है जिसे हिंदुस्तान से सचमुच प्यार है।
हमें डर है, आपसे नही, आपके बहाने हमारे अपनो की लगाई जाने वाली आग से, क्योकि…जब लगेगी आग तो, आएंगे क़ई घर जद में,
और यहां पे सिर्फ तुम्हारा मकान थोड़ी है..
ईश्वर आपको धीरज दे।

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