लॉक डाउन में इन महिलाओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही हैं

शाहीन बाग़ याद हैं आपको वहां कई महीनो तक देश की महिलाएं NRC और CAA के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना दे रही थी. उन महिलाओं को धरना देने का अधिकार उसको देश के संविधान ने अनुच्छेद 19 (1) (B) में दिया हैं इस अनुछेद में कहा गया की नागरिक अपनी मांग और किसी बात के विरोध के लिए शांतिपूर्ण तरीके से एक जगह इकट्ठा होकर कर सकते हैं. इस कानून में कहा गया की कोई भी विरोध प्रदर्शन करने के लिए सरकार और प्रशासन से पहले से अनुमति लेना जरूरी है. जाहिर सी बात हैं शाहीन बाग़ में धरना देने का भी अनुमति मोदी सरकार ने दिया होगा क्योंकि दिल्ली में कानून केंद्र सरकार का चलता हैं

फिर कुछ मानसिक दिमागी बिमारी ग्रस्त लोग उन महिलाओं पर गन्दी गन्दी टिपण्णी की. उनके नाम पर गन्दी गन्दी वीडियो वायरल किया। उन महिलांओं को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। यहाँ तक की देश के गृह मंत्री अपनी मर्यादा तक भूल गए और शाहीन बाग़ को पाकिस्तान और पाकिस्तानी समर्थक करार दिया.

आज लॉक डाउन में इन महिलाओं की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. वैसे तो शराब पीना बुरी बात हैं. सरकार इसे छोड़ने की बार बार अपील भी करती हैं लेकिन फिर भी लोग पीते हैं. कोई बात नहीं हम उसपर भी टिपण्णी नहीं करना चाहेंगे. क्योंकि इन महिलांओं को भी देश का संविधान ने अपने 21वां अनुच्छेद में इच्छानुसार खाने, पीने, कपडे पहनने की आज़ादी देता है। लेकिन इतना उन लोगों को जरूर कहेंगे जो शाइन बाग़ की महिलाओं पर गंदे गंदे कमेंट्स किये थे.

उनलोगों को याद रखना चाहिए की शाहीन बाग़ की महिलाये तो अपने अधिकार के लिए अपनी सरकार के खिलाफ धरना दे रही थी. जितना देश में लोग धरना देंगे उतना देश का लोकतंत्र मजबूत होता हैं. एक अच्छे लोकतंत्र की निशानी हैं शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना. धरना देना. लेकिन देश की महिलाएं शराब की दूकान पर लाइन लगकर शराब की बोतल ख़रीदे ये किसी लोकतंत्र को मजबूत नहीं करता बल्कि देश की संस्कृति, सभ्यता और जो भारतीय नारी का त्याग बलिदान, मर्यादा का इतिहास हैं उसको इन महिलाओं ने कंलकित करने का काम किया हैं. देश को बदनाम करने का काम किया हैं. खैर आखिरी में इतना फिर कहूंगा इनको भी अधिकार संविधान ने दिया हैं. इसलिए शाहीन बाग़ पर गंदे कमेंट्स करने से पहले उसके महत्व अधिकार को समझा जाना चाहिए।

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